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Monday, April 26, 2021

संकट मोचन काटेंगे संकट - खोजी बाबा

बबलू चक्रबर्ती

27 अप्रैल 2021 दिन मंगलवार को अजर अमर देवता ग्यारहवें रूद्रावतार श्री हनुमन्त लाल जी महाराज का प्राकट्य दिवस है । अतः सभी संकट मोचन हनुमान से प्रार्थना करें | उनकी कृपा से सभी संकट दूर होंगे । यह कहना है आगरा के गौसेवक" प.मदन मोहन रावत खोजी बाबा का । उन्होंने कहा कि श्री हनुमानजी महाराज अष्ट सिद्धी और नौ निधियों के दाता है जो असम्भव को सम्भव बनाने वाले देव है । लेकिन महावीर हनुमानजी महाराज को श्राप दिया था । कि तुम अपनी शक्तियों को भुल जाओगे। कारण सब जानते होंगे । क्योंकि बाल्यकाल अवस्था में हनुमन्त लाल जी बहुत उद्दंड थे, बाल बल बुद्धि के चलते वे ऋषि, मुनियों को परेशान करते थे जिससे दुखी ऋषी मुनियों ने उन्हें श्राप दिया । लेकिन माता अंजनी ने ऋषियों से क्षमादान की प्रार्थना की तो ऋषियों ने श्राप दंड से मुक्त होने की युक्ति बताते हुये कहा कि जब तक इन्हें इनकी कोई बल और शक्तियां याद नही दिलाएगा तब तक ये अपनी शक्तियों से अज्ञान रहेंगे । लेकिन माता सीता की खोज को जब हनुमान जी को चुना गया तो वे हताश हो उठे, मगर उनके भाव को समझ रीछराज जामवंत ने उन्हें उनकी शक्ति और बल की याद दिलाई । खोजी कहते है कि उसी समय महावीर बजरंगबली ऋषी मुनियों के श्राप से मुक्त हुये और जय श्रीराम के उद्घोष के साथ विशाल समुद्र को पार करने हेतु छलांग लगा दी । इतना ही नहीं माता जानकी व प्रभु श्रीराम के हर संकट में सच्चे सेवक संकट मोचन बने । खोजी कहते है आज 27 अप्रैल पूर्णिमा और मंगलवार का अत्यंत शोभाग्यशाली दिन है । तो आओ सारी मानव जाति को कोरोना नामक दैवीय आपदा से मुक्ति दिलाने हेतु हम सब मिलकर कलयुग के देव श्री हनुमानजी महाराज को उनकी शक्ति याद दिलाऐ । खोजी कहते जो प्रभु के संकट में सहायक बन सकते है वो तुच्छ मानव जाति के सारे संकट हर सकते है । अतः आज 27 अप्रैल मंगलवार के दिन हम सभी को एक दीपक सरसों के तेल का और एक देशी घी का दीपक जलाकर । श्री हनुमान चालीसा पाठ व 108 बार 
"नासे रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बल बीरा"
श्लोक मंत्र का जाप करना है। खोजी कहते है इसके लिये कोरोना काल को देखते हुये मंदिर जाने की जरूरत भी नहीं, अपने अपने घरों में ही यह उपाय करें और भरोसा करें कि आपकी प्रार्थना निश्चय ही फलदायी होगी। इसमें किन्चितमात्र कोई सन्देह नहीं। 

नोट - अब हनुमन्त लाल जी महाराज अपनी शक्तियां खोये हुये हैं। समुद्र लांघने के लिए श्री जामवंत जी ने किष्किंधा काण्ड में उन्हें उनकी शक्तियां याद दिलाई हैं। 

कहहिं रीछपति सुन हनुमाना। का चुप साधि रहेऊ बलवाना।।

पवन तनय बल पवन समाना।बुद्धि विवेक विग्यान निधाना।।

कवन सो काज कठिन जग माही। जो नहीं होई तात तुम नाही।।

राम काज लगी तब अवतारा। सुनतहि भयहु पर्वताकारा।।

 इन चौपाईयों को श्रीहनुमान चालीसा पाठ एवं जाप से पहले पढनी हैं।

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