Search This Blog

~अगर आप मनसुख टाइम्स समाचार पत्र या समाचार पत्र की वेब साईट www.mansukhtimes.com में अपने विज्ञापन चाहते हैं तो कृपया हिन्दी में लिखें या 9457096970, 7902127305 पर सम्पर्क करें | धन्यबाद:~ मुख्य संपादक ~:आवश्यक सुचना:~ मनसुख टाइम्स समाचार पत्र के सभी सम्मानित और प्रिय पाठकों विज्ञापनदाताओं को अबगत कराना है कि मनसुख टाइम्स समाचार पत्र की बड़ती लोकप्रियता को देखते हुये कुछ लोग समाचार पत्र के नाम से अबेध उगाही कर रहे हैं । जिनसे मनसुख टाइम्स समाचार पत्र का कोई सम्बन्ध नही है । अतः आप सभी से निवेदन है यदि इस तरह का कोई भी व्यक्ति आप से धन उगाही का प्रयास करता है तो आप मो. न. 7902127305, 9457096970 नम्बर या सम्बन्धित थाना पुलिस को सूचित कर सकते हैं। इसके अलाबा मनसुख टाइम्स समाचार पत्र में प्रमुख पर्वों पर प्रकाशित विज्ञापन का नगद या चेक भुगतान मनसुख टाइम्स के नाम समाचार पत्र के अधिक्रत प्रतिनिधी को ऊपर दिये नम्बरों पर कॉल करके ही दें । :~ मुख्य संपादक

Sunday, May 3, 2020

भारत में मीडिया को मिला क्या ...?

अनदेखी या आजादी
बबलू चक्रबर्ती  
भारत में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर भले अक्सर चर्चा होती रहती हो, लेकिन उन चर्चाओं को सकारात्मक सोच से कभी स्वीकार नहीं किया गया | यही बजह हैं कि भारत में प्रेस को धरातल पर पूर्ण स्वतंत्रता नहीं मिल पा रही|नतीजा पत्रकार की सुरक्षा स्वतंत्रता पूरी तरह भगवान भरोसे हैं, वो भी तब जब मीडिया को लोक तन्त्र का चौथा स्तम्भ माना गया हो, लेकिन देश के इस अति महत्वपूर्ण चौथे स्तम्भ को अन्य स्तम्भ की अपेक्षा हर सुबिधा से अछुता रखा गया हैं | आखिर ऐसी अनदेखी क्यों ? जिस पर देश की सरकार और हर पत्रकार को गहन मंथन करने की जरूरत हैं | हालांकि ऐसा भी लगता हैं जेसे कि पूर्व के समय से लेकर आज के पत्रकार सिर्फ और सिर्फ चर्चाओं तक ही सीमित रहना चाहते हैं, भविष्य की पत्रकारिता बेहतर बने पत्रकारों की सुख सुबिधा सुरक्षा और अधिकारों पर जेसे कोई गम्भीर ही नहीं रहा | शायद यही बजह हैं कि आज पत्रकार तमाम तरह की समस्या और जोखिमों का सामना करने को विवश हैं | बरहाल विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर इस विषय पर प्रकाश डालते हुये पूर्व की भांति आज 3 मई को मनाए जाने वाले विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर भी प्रेस की स्वतंत्रता पर चर्चा करें तो आज प्रेस दुनिया में खबरें पहुंचाने का सबसे सरल सुगम माध्यम है । भारत में प्रेस की स्वतंत्रता भारतीय संविधान के अनुच्छेद-19 में भारतीयों को दिए गए अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार में सामिल है । विश्व स्तर पर प्रेस की आजादी को सम्मान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया | अत: इस दिन को विश्व प्रेस दिवस के रूप में भी जाना जाता है । यूनेस्को द्वारा 1997 से हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज भी दिया जाता है । यह पुरस्कार उस व्यक्ति अथवा संस्थान को दिया जाता है जिसने प्रेस की स्वतंत्रता के लिए सराहनीय उल्लेखनीय कार्य किया हो । लेकिन सोचनीय विषय हैं कि वर्ष 1997 से आज तक शायद भारत के किसी भी पत्रकार को यह पुरस्कार नहीं मिला, इसकी एक बड़ी वजह हैं कि देश के पत्रकार पत्रकारिता के मानदंडों में अंतर बताने में उलझे रहे । यहाँ यह कहना अनुचित नहीं कि भारतीय पत्रकारिता में हमेशा से ही विचार हावी रहा मतलब कथनी और करनी में जमीन आसमान जेसा अंतर | जबकि पश्चिम में सदेब तथ्यात्मकता पर जोर दिया जाता रहा । यही एक कारण हैं कि इससे कहीं न कहीं हमारे पत्रकारिता के स्तर में कमी आती चली गयी । इसके अलावा भारतीय पत्रकारों में पुरस्कारों के प्रति जागरूकता की भी बेहद कमी है, वे इसके लिए प्रयासरत ही नहीं रहते । प्रेस समाज का आईना होता है। प्रेस की आजादी से यह बात साबित होती है कि उस देश में अभिव्यक्ति की कितनी स्वतंत्रता है । भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में प्रेस की स्वतंत्रता एक मौलिक जरूरत है । प्रेस और मीडिया हर जोखिम उठा कर हमारे आसपास घटित होने वाली घटनाओं से हमें अवगत करवा कर हमारे लिए खबर वाहक का काम करती हैं और यही खबरें हमें दुनिया के बदलाव से जोड़ने में मदद करती हैं, फिर भी देश के इस महत्वपूर्ण स्तम्भ की अनदेखी कहीं न कहीं मीडिया के अस्तित्व को जानबूझ कर खतरा पैदा करने समान साबित होती हैं | इन सभी विषयों पर शायद ही कोई सोचता होगा | लेकिन समझ तो यह नहीं आता कि भारत की मीडिया को अब तक आखिर मिला क्या अनदेखी या आजादी ?

   लेखक के यह निजी बिचार हैं जिसे नकारात्मक नजर से नहीं अपितु सकारात्मक सोच से समझें

No comments:

Post a Comment